Wednesday, July 22, 2009

Koshish

काम की जद्द-ओ-जेहद में कुछ पल चुराने की कोशिश,

कुछ देर ही सही तेरे पास आने की कोशिश;

वक़्त कितना भी मिले साथ, कम लगता है,

रोज़ शाम वक़्त को रोक पाने की एक नाकामयाब कोशिश.

..
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तेरी यादों में बैठे रहे, ऐसी एक नामुमकिन सी कोशिश,

हुक्मरानों के आगे ये हिमाकत कर जाने की कोशिश,

लेकिन पथरीली जिंदगी के आगे इन नाजुक जज्बो के क्या माने,

बाकी जिंदगी चलाने के लिए तुझे भूल जाने की कोशिश